सोमवार, 20 अक्टूबर 2008

फ्रांस की राजधानी पेरिस में फेफडे के स्वास्थ्य को लेकर चल रही ३९ वीं अन्तरास्त्रिय सेमिनार के दौरान विसेसज्ञों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यह बात निकल कर आयी है की विश्व में फेफडे के रोग द्वारा होने वाली कुल मौतों में से ५० प्रतिशत लोगों की मौत तम्बाकू जनित बिमारियों की वजह से होती है। यही नहीं दुनिया में तपेदिक रोग से होने वाली प्रत्येक ५ में से १ व्यक्ती की मौत तम्बाकू के सेवन से होने वाली तपेदिक की बिमारियों से होती है। इस सम्बन्ध में तपेदिक रोग तथा फेफडे से सम्बंधित बिमारियों पर बने अन्तरास्त्रिय संगठन के कार्यकारी निदेशक डाक्टर नील्स बिल्लो का कहना है की “तपेदिक से होने वाली इन पॉँच मौतों में से १ को आसानी से रोका जा सकता है यदि लोग धूम्रपान का सेवन बंद कर दें तो।” तपेदिक रोग तथा फेफडे से सम्बंधित बिमारियों पर बने अन्तरास्त्रिय संगठन वैश्विक स्तर पर तम्बाकू विरोधी तथा जन स्वास्थ्य से सम्बंधित विषयों पर काम कर रहा है।

विश्व में कुल तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों में से ८० प्रतिशत लोग निम्न और मध्यम वर्गीय आय वाले देशों के लोग हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में करीब ५० लाख लोगों की मौत हर साल तम्बाकू जनित कारणों से होती है। यदि तम्बाकू का प्रयोग इसी तरह से चलता रहा तो आने वाले ५० सालों में मरने वालों लोगों की संख्या करीब ४२० मिलियन हो जायेगी।

छत्रपती चिकित्सा विश्वविद्यालय में चल रही तम्बाकू नशा उन्मूलन केन्द्र के प्रमुख तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अन्तरास्त्रिय तम्बाकू विरोधी पुरूस्कार से सम्मानित डाक्टर रमाकांत का कहना है की “ यह अत्यन्त आवश्यक है की तपेदिक रोग के साथ जीवन जी रहे लोगों के लिए तम्बाकू नशा उन्मूलन केन्द्र को और बढाया जाए इस तरह के केन्द्र प्रत्येक जनपद के जिला चिकित्सालय तथा जिले के प्रत्येक विकास खंडों पर हो।”

हार्वर्ड विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि यदि चीन में धूम्रपान की आदत और जैव ईधन एवं कोयले की खपत की मौजूदा प्रवृत्ति जारी तो वर्ष २०३३ तक क्रोनिक प्रतिरोधी फेफडे के रोग (सीओपीडी) से करीब ६।५ करोड और फेफडे के कैंसर से अनुमानित १.८ करोड लोगों की मौत हो जाएगी। विज्ञान पत्रिका "साइंस डेली" ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि श्वास से संबंधित रोग चीन में होने वाली मौतों के १० प्रमुख कारणों में से हैं।

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